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भक्ति में सराबोर हुआ टीएमयू

  • उत्तम मार्दव धर्म के दिन कम से कम देखें दर्पण
  • सीसीएसआईटी की बहुरूपी ब्रह्मगुलाल की धमाकेदार प्रस्तुति
  • प्रथम स्वर्ण कलश के अभिषेक करने का सौभाग्य अंश जैन को मिला
  • अवार्ड ऑफ द डे रहे सीसीएसआईटी के तीन स्टुडेंट्स

प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

उत्तम मार्दव धर्म के सुअवसर पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिद्धि सिद्धि में भक्तिमय संगीत पर सभी श्रावक और श्राविकाएं आस्था के रंग में रंगे नजर आए। इस मौके पर कुलाधिपति के अलावा फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रिचा जैन, जैन फैकल्टीज के साथ सैकड़ों श्रावक और श्राविकाएं मौजूद रहे। दूसरी ओर कल्चरल इवनिंग का शुभारम्भ सीसीएसआईटी के छात्र-छात्राओं ने बहुरूपी ब्रह्मगुलाल नाटिका के जरिए किया। इसके अलावा छात्राओं की ओर से प्रस्तुत भक्ति गीत और नृत्य ने मनमोह लिया। नाटक के सभी पात्र विशेषकर ब्रह्मगुलाल और राजकुमार ने अपने अभिनय से सभी का दिल जीत लिया। इस आध्यात्मिक शाम के मुख्य अतिथि बिलारी के एसडीएम श्री अनुराग जैन, आईएएस रहे। इस मौके पर मेडिकल कालेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. एसके जैन ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट किए इस दौरान कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, एफओईसीएस के निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी, निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा की गरिमाई मौजूदगी रही। अवार्ड ऑफ द डे सीसीएसआईटी के तीन स्टुडेंट्स . हर्ष जैन, उमंग अग्रवाल, चिराग खददर रहे।

उत्तम मार्दव धर्म के दिन प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अंश जैन, द्वितीय स्वर्ण कलश का सौभाग्य सुब्रत जैन और तृतीय स्वर्ण कलश का सौभाग्य साहिल जैन चतुर्थ स्वर्ण कलश का सौभाग्य अभिषेक जैन को प्राप्त हुआ। श्रीजी की स्वर्ण कलश से शांतिधारा करने का सौभाग्य रिद्धम जैन और रजत कलश से शांति धारा करने का सौभाग्य हर्षित जैन, चिराग जैन, यश जैन, विराल जैन, आयुष जैन, जय जैन, सार्थक जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा और अभिषेक करने वालों को रजत कलश से सम्मानित भी किया गया। अभिषेक के बाद दिल्ली सेे आए सरस एंड पार्टी ने अपनी सुरीली आवाज पर… मुरादाबाद में प्रभु की शाम में … आए है पुजारी प्रभु की शरण में …, जबसे गुरु दर्श मिला मन है मेरा खिला खिला …, टीएमयू में दसलक्षण की पावन बेला आयी … भजनों पर श्रावक और श्राविकाएं जमकर झूमे। इनके अलावा जीवीसी श्री मनीष जैन, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ऋचा जैन, एमजीबी श्री अक्षत जैन भी भक्ति में लीन नजर आए। ये सभी हाथों में चँवर लिए हुए थे।

सम्मेद शिखर से आए पंडित श्री रिषभ जैन उत्तम मार्दव धर्म के दिन श्रावक-श्राविकाओं को मंत्रों का उच्चारण कराते और अर्थ समझाते हुए पूजा कराई। उत्तम मार्दव धर्म के बारे में विस्तार से बोले, मान का मर्दन करना ही मार्दव धर्म कहलाता है। बोले, सबके साथ सरल व्यवहार रखो। किसी भी चीज का घमंड न करो। झूठा दिखावा कतई न करें। पूजन करते वक्त स्वास्तिक बनाने का कारण भी समझाया। ब्रह्मचारिणी बहन कल्पना जैन ने स्टुडेंट्स को भक्ति भाव में पूजन करने के लिए प्रोत्साहित किया। पंडित जी ने विधिपूर्वक नवदेवता पूजन ,सोलहकारण पूजन ,पंचमेरू पूजन ,दशलक्षण आदि पूजन कराया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का श्रीगणेश दो बालिकाओं की जिनवाणी स्तुति और मनमोहक नृत्य से हुआ। इसी क्रम में… मंदिर में बज रही घंटी मंगल छाया है… और जय हो शंखेश्वरा नमो नमो श्री जिनवरा… पर छात्रों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। ब्रह्म गुलाल नामक नाटिका में मानव के भिन्न-भिन्न भावों को चित्रांकित किया गया जैसे क्रोध, वीरता, हास्य, ईर्ष्या, भय, द्वेष, राग इत्यादि। ब्रह्म गुलाल एक बहुरूपी प्रतिभा धनी व्यक्ति है जो किसी का भी रूप धारण करने में सक्षम है। तपन नगर के राजकुमार के परम मित्र है। अपनी इस प्रतिभा के फलस्वरूप नगर में वे बहुत प्रतिष्ठा अर्जित करते हैं। वे अपने स्वरूप में इतना खो जाते हैं कि उन्हें अपने वास्तविकता का बोध ही नहीं रहता हैं। अपने राजकुमार मित्र के मनोरंजन के लिए कभी वे नर्तकी बनते तो कभी मस्खरा। एक दिन वह सिंह के रूप में राजकुमार की ही हत्या कर देते हैंए जिसका बदला लेने के लिए राजा उन्हें दिगंबर मुनि बन कर प्रवचन करने को कहते हैं। हास्य-हास्य में किया गया स्वांग ब्रह्म गुलाल के लिए मुक्ति के वरण का ही मार्ग बन जाता है। वह वास्तविक रुप से दिगंबरी मुनि दीक्षा धारण कर लेता है। ब्रह्म गुलाल नाटिका में भावेश, सर्वज्ञ, हर्ष, उमंग, चिराग, मुदित, पारस, अरिहंत, सार्थक आदि ने भाग लिया।

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