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जीवन में तनाव प्रबंधन भी अनिवार्य : डॉ. प्रेरणा

  • टीएमयू के कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज में तीन दिनी स्ट्रेस मैनेजमेंट पर वेबिनार
  • हमारे दिमाग में प्रतिदिन जन्म लेते हैं 50 हजार विचार : वरिष्ठ मनोचिकित्सक
  • मोटिवेशनल स्पीकर संजय बोले, सदैव सकारात्मक व्यक्तियों के साथ रहें
  • एक इंटरप्रिन्योर का आशावादी होना जरुरी और सफलता के प्रति विश्वस्त

तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. प्रेरणा गुप्ता ने कहा, मनुष्य का मस्तिष्क उसके पूरे शरीर, अंगों, विचारों और क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क को स्वस्थ रखना हमारी सर्वप्रमुख जिम्मेदारी है। तनाव जीवन का अभिन्न अंग है, लेकिन यह हमेशा बुरा नहीं होता। जो तनाव हमें ख़ुशी और तृप्ति प्रदान करे वह सकारात्मक है। किसी रोलर कोस्टर पर सवारी करना, रेस में हिस्सा लेना, परीक्षा देना आदि सकारात्मक तनाव हैं। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज की ओर से स्ट्रेस मैनेजमेंट पर आयोजित तीन दिनी वेबिनार में बोल रही थीं। डॉ. गुप्ता बोलीं, हम जिस समाज में रहते हैं, तनाव भी वहीं रहता है। हम इससे बच नहीं सकते। हमें केवल तनाव को प्रबंध करना सीखना होगा। उन्होंने तनाव प्रबंध करने के टिप्स देते हुए चेताया, कुछ लोग तनाव से बचने के लिए शराब, ड्रग आदि का सहारा लेते हैं, जो बेहद हानिकारक है। अतः तनाव से बचने के लिए सकारात्मक चीजें- खेल, योग, संगीत आदि की शरण में जाना चाहिए। अपना सम्मान करो और अपनी देखभाल करो। अपनी भावनाओं को उन लोगों से व्यक्त करें, जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। हमारे दिमाग में प्रतिदिन पचास हजार विचार जन्म लेते हैं, जिसमें केवल दस हजार सकारात्मक होते हैं। हमें प्रयास करना चाहिए, चालीस हजार सकारात्मक और दस हजार नकारात्मक हो जाएं। वर्तमान में रहना सीखो। अतीत के बारे में अधिक सोचने से वर्तमान भी नष्ट हो जाएगा।

अहमदाबाद के लाइफ कोच एवं मोटिवेशनल स्पीकर संजय जैन ने अवचेतन मन की शक्ति पर चर्चा करते हुए कहा, संसार विविधताओं से भरा है। कोई गरीब, कोई अमीर, कोई दुखी, कोई सुखी है। जीवन उतार चढ़ाव से भरा है। लोग अपना अधिकतर समय धन कमाने के लिए परिश्रम करने में व्यतीत करते हैं। इसके बावजूद पद पोजीशन की सफलता व्यक्ति के लिए सुखी और ख़ुशी की गारंटी नहीं है। पैसा और भौतिक उन्नति संतोष का साधन नहीं है। हमें सजगता से काम लेना चाहिए और आत्मावलोकन करना चाहिए। स्वयं को पहचाने, हम कौन है? दुनिया में क्यों आए हैं? जीवन का उद्देश्य क्या है? हम हर पल समाज का एक अभिन्न हिस्सा बनकर रहते हैं और हम कुछ नकारात्मक विश्वास बना लेते है, जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है। श्री जैन बोले, सजग रहे। अच्छी पुस्तकें पढ़ें। सदैव अच्छे, सकारात्मक व्यक्तियों के साथ रहें।

नागपुर के यूनिक क्लीनिक की प्रबंध निदेशक डॉ. ऋचा जैन ने स्वरोजगार पर बोलते हुए कहा, दूसरों की नौकरी करने के बजाए यदि हम अपना काम करते हैं तो हम दूसरों को रोजगार दे सकते हैं। एक स्वरोजगार चाहने वाले व्यक्ति को खतरा मोल लेना होता है, क्योंकि जरुरी नहीं, स्वरोजगार में हमेशा लाभ हो या सफलता मिले। व्यक्ति को अच्छा संचालक होने के साथ-साथ मौलिक प्रयोग और आविष्कार का धनी होना चाहिए। वह बोलीं, एक स्वरोजगार कर्ता में उत्तरदायित्व उठाने की इच्छा, मध्यम खतरा लेने की इच्छा, ऊर्जावान, भविष्य को ध्यान में रखना, कुशलताओं का समायोजन, अपना मूल्य बनाने की योग्यता आदि भी विशेषताएं होनी चाहिए। एक इंटरप्रिन्योर को आशावादी होने के साथ-साथ अपनी सफलता के प्रति विश्वस्त होना अधिक आवश्यक है। डॉ. ऋचा बोलीं, खतरे का आकलन, बाजार की चलन और समाज की आवश्यकता को पहचानकर व्यापार को चलाना अति आवश्यक है। अपने संसाधनों की प्रबंध, लोगों को साथ लेकर चलना और उनका विश्वास जीतना एक कारोबारी की सबसे बड़ी सफलता होती है। उन्होंने ऑनलाइन बिज़नेस अमेजन, स्नैपडील आदि का उदहारण देते हुए कहा, इस महामारी के दौर में घर बैठे कुछ कमाना एक नई सोच बना लोगों ने अगरबत्ती, मास्क सेनिटाइज़र घर बैठकर बनाए। कोई भी व्यवसाय एकदम बड़ा नहीं होता, एक प्राथमिक स्तर से ही हर कारोबार शुरू होता है। धैर्य, समर्पण और परिश्रम हमें धरती से आकाश तक पहुंचा सकते हैं। वेबिनार में कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज के उपप्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार, श्रुति सिन्हा, श्री नवरीत बूरा, श्री राकेश यादव, प्रियंका सिंह, श्रीमती कंचन गुप्ता, डॉ. रूचि कांत, श्री रवि कुमार के अलावा एमएलटी, रेडियोलॉजी, ऑप्टोमेट्री, फोरेंसिक विभाग के करीब 150 छात्र-छात्राएं ऑनलाइन रहे। वेबिनार का संचालन डॉ. अर्चना जैन ने किया।

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