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पर्यावरण संरक्षण को बनाएं जीवन शैली का अंग,टीएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोले, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत के प्रोफेसर डॉ. केडी यादव

  • कोरोना ने हमें ऑक्सीजन का महत्व सिखाया : प्रो. द्विवेदी
  • हम प्रकृति की प्रदत्त वस्तुओं का मिसयूज न करें : प्रो. जैन
  • वेबिनार में बीटेक के करीब 100 स्टुडेंट्स ने की शिरकत

पर्यावरण संरक्ष्ण के प्रति अपना योगदान देने के लिए किसी इंजीनियरिंग की डिग्री की आवश्यकता नहीं है। पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन शैली का अंग बनाना होगा, तभी पर्यावरण की सुरक्षा संरक्षण एवं संवर्धन हो सकता है। यह उदगार राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत, गुजरात में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ के डी यादव के हैं। वह फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड कम्प्यूटिंग साइंस के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से पर्यावरण दिवस पर आयोजित एक दिवसीय वेबीनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। डेढ़ घंटे तक चली यह वेबिनार जूम ऐप के माध्यम से हुई, जिसमें जैव विविधता एवं पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित प्रश्न भी पूछे गए। मुख्य वक्ता डॉ. यादव ने इंजीनियरिंग के छात्रों से कहा, वे वैकल्पिक ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, सतत विकास, सीवेज ट्रीटमेंट और विषैली गैसों के उत्सर्जन से बचाव के क्षेत्र में अधिक से अधिक कार्य करें, जिससे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। श्री यादव ने पुनः उपयोग, पुनः प्रयोजन और पुनः चक्रण के महत्व के विषय मे बताया। उन्होंने अपशिष्ट फूलों से खाद बनाने के अपने शोध के विषय में भी विस्तार से चर्चा की।

कॉलेज के निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी ने इकोसिस्टम रीस्टोरेशन थीम के बारे में बताते हुए कहा, हमें इसका संयोजन करना आवश्यक है। कोरोना महामारी ने हमें ऑक्सीजन का महत्व सिखाया। अतः हमें वृक्ष लगाकर पर्यावरण के प्रति अपना दायित्व पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने यह पर्यावरण विश्व दिवस मनाने का दायित्व लिया है क्योंकि पर्यावरण विषय सिविल इंजीनियरिंग का एक अभिन्न अंग है। हम सभी को पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्य को भली-भांति पूरा करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी भी प्रकृति के सभी उत्पादों का लाभ ले सके।

इससे पूर्व कार्यक्रम संयोजक सिविल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरके जैन ने सभी का ऑनलाइन स्वागत करते हुए कहा, विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून, 1972 से मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया, इस वर्ष पर्यावरण दिवस की थीम ‘पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन’ है। उन्होंने जैन सिद्धांत का संदर्भ देते हुए बताया, एक मूल वाक्य अनर्थदंड व्रत है। इसके अनुसार हमें प्रकृति की दी हुई किसी भी चीज का दुरुपयोग नहीं करना है जैसे पानी, बिजली, हवा भोजन आदि। अंत में वेबिनार के कोऑर्डिनेटर श्री अंकित शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा, पर्यावरण की सुरक्षा की आदत को स्वयं अपनाकर और दूसरों को जागरूक कर के ही पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य सार्थक हो सकता है। वेबिनार में निकिता गर्ग, एके पिपरसेनिया, निशा सहल, सिद्धार्थ माथुर और बीटेक के लगभग 100 छात्र उपस्थित रहे ।

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