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‘आधी दुनिया को संग लिए बिना
सर्वांगीण विकास असंभव’
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की ओर से ऑनलाइन आयोजित विमन इंटरप्रिन्योरशिप डवलपमेंट प्रोग्राम- डब्ल्यूईडीपी का श्रीमती नीलिमा कटियार ने किया श्रीगणेश, कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने उम्मीद जताई- प्रशिक्षण महिलाओं की तकदीर और तस्वीर बदलेगा

  • महिला उद्यमी संवर्धन को टीएमयू प्रतिबद्ध : मनीष जैन
  • महिला उद्यमियों का काम पुरुष इंटरप्रिन्योनर्स से बेहतर :वीसी
  • आर्थिक विकास में महिलाओं की सहभागिता जरुरी :अक्षत
  • संगीता राज चौधरी ने सफलता को 10 मास्टर स्टेप्स बताए
  • निर्यातक तान्या भाटिया ने सरकारी योजनाओं पर डाला प्रकाश
  • निर्यातक अनु ढल ने साझा की छात्रा से उद्यमी बनने तक की अपनी कहानी
  • उद्यमी महिलाओं ने बदली आर्थिक विकास की तस्वीर : प्रो. द्विवेदी
  • डब्ल्यूईडीपी ब्रोशर का किया प्रौद्योगिकी मंत्री ने विमोचन

यूपी की उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्रीमती नीलिमा कटियार बतौर मुख्य अतिथि बोलीं, भारतीय मूल में अर्धनारीश्वर का कांसेप्ट रहा है। कभी भी लिंगभेद जैसी अवधारणा भारतीय संस्कृति में नहीं रही है। यह तो विदेशी आक्रांताओं के कारण भारत में इस तरह की दुर्भावनाएं अस्तित्व में आई हैं। भारत के विकास में सभी का सहयोग आवश्यक है। बिना 50 प्रतिशत आबादी अर्थात महिलाओं को साथ लिए समाज और देश का विकास असंभव है। आर्थिक आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास का जन्म होता है। देश में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए महिला उद्यमियों के सतत विकास की आवश्यकता है। नारी को महान शक्ति का स्त्रोत पहचान कर ही भारत ने उसे नमन किया है। वर्तमान सरकार ने भारतीय नारी को आर्थिक, शैक्षिक और भावनात्मक रूप से सशक्त और उन्नत बनाने के सदा ही प्रयास किए हैं। कोरोना काल में अनगिनत नए स्टार्टअप का जन्म हुआ, जिनमें अधिकतर महिलाओं ने शुरू किए। अभी महिला उद्यमिता के क्षेत्र में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, मुझे पूर्ण विश्वास है कि फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज के जरिए आयोजित महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल रहेगा। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज-एफओईसीएस की ओर से ऑनलाइन आयोजित विमन इंटरप्रिन्योरशिप डवलपमेंट प्रोग्राम- डब्ल्यूईडीपी में बोल रही थीं। इस मौके पर चार सप्ताह तक चलने वाली विमन इंटरप्रिन्योरशिप डवलपमेंट प्रोग्राम- डब्ल्यूईडीपी की विवरणिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी प्रवक्ता श्रीमती नेहा आनंद ने किया। इस डब्ल्यूईडीपी की कन्वेनर डॉ. गुलिस्ता खान ने बताया, इस महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम में यूपी के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक आदि 11 प्रदेशों की प्रतिभागी ट्रेनिंग लेंगी।

टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन बोले, छात्राएं आजकल केवल पारंपरिक विषयों में नहीं अपितु कठिन और चुनौतीपूर्ण कारोबार का चुनाव कर हर फील्ड में अपना परचम लहरा रही हैं। वे सिविल सेवा, रक्षा के तीनों अंगों-थल, जल और वायु के साथ-साथ अंतरिक्ष में भी अपना परचम लहरा रही हैं। इससे पहले उन्होंने अपने पांच दशकों के चुनौतीपूर्ण जीवन यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया, किस तरह विषम परिस्थियों में भी अपने कठिन परिश्रम एवं आत्मविश्वास के माध्यम से समाज को शिक्षित करने के उद्देश्य से तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी रूपी वट वक्ष का बीजारोपण किया। उन्होंने कहा, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी अपनी स्थापना से ही शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में सक्रिय रहा है। यहां छात्र-छात्राओं को हमेशा जॉब सीकर की जगह जॉब क्रिएटर बनने पर जोर दिया जाता है। कुलाधिपति बोले, अधिकतर महिलाओं को व्यापार प्रारभ्म करते समय अनेक तरह की प्रारंभिक प्रबंधन, निधि और संवाद स्तर की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने चार हफ्तों तक चलने वाली यह कार्यशाला उद्योग और शैक्षिणक क्षेत्र के विभिन्न प्रशिक्षकों के माध्यम से नवोदित एवं वर्तमान महिला उद्यमियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। टीएमयू के ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन ने एफओईसीएस को प्रेषित अपने सन्देश में कहा, यूनिवर्सिटी महिला उद्यमियों के आर्थिक विकास के प्रति हमेशा से ही प्रतिबद्ध रही है। पाठ्यक्रम में नवाचार के प्रति संकल्पित हैं। साथ ही 21वीं सदी की शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में वैश्विक जरूरतों के प्रति संजीदा हैं।

टीएमयू के कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह बोले, उद्यमियों के पास कठिन परिश्रम के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया, किस तरह महिला उद्यमी पुरुष उद्यमियों से बेहतर कार्य कर रही हैं। महिला उद्यमी अपने व्यापक उद्देश्य, सामाजिक योगदान, धैर्य एवं नेतृत्व क्षमता के माध्यम से स्वयं को हर क्षेत्र में श्रेष्ठ सिद्ध कर रही हैं। महिला उद्यमी अपने लिए ही नहीं बल्कि दीगर लोगों के लिए नए जॉब सृजित करती हैं और समाज को प्रबंधन, संगठन और व्यावसायिक समाधान उपलब्ध कराती हैं।

एमजीबी श्री अक्षत जैन बोले, महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करना आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, अगर किसी खेल में आधे खिलाड़ियों को खेलने का अवसर ही नहीं दिया जाए तो उस टीम का जीतना कठिन है। ठीक इसी तरह अगर देश के आर्थिक विकास में आधी आबादी अर्थात महिलाओं की सहभागिता नहीं होगी तो सम्पूर्ण विकास कैसे संभव है। इससे पूर्व मुख्य अतिथि माननीय उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्रीमती कटियार का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होंने शैक्षिक और उद्यमिता के क्षेत्र में इंजीनियरिंग कॉलेज और यूनिवर्सिटी के समर्पण को देखने के लिए विश्वविद्यालय आने का आमंत्रण भी दिया।

मुरादाबाद की निर्यात फर्म – साई आर्ट इम्पेक्स इंडिया की ओनर श्रीमती अनु ढल ने अपनी छात्रा से एक विवाहित महिला उद्यमी बनने तक की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी सफलता, कार्य में निरंतरता एवं ईश्वर में अटूट विश्वास के कारण हुई। उन्होंने कहा कि छात्राओं को अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अपने कम्फर्ट जॉन से बाहर निकलने का प्रयास करना चाहिए। टर्बोस्टार्ट की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, बंगलुरु की श्रीमती संगीता राज चौधरी बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर ने 10 मास्टर स्टेप्स के माध्यम से आम महिला से एक सफल उद्यमी के रूप में स्वयं को बदलने के तरीके बताए। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े उदाहरण देते हुए बताया, जीवन में आत्मविश्वास से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। डाईमक इंडिया सर्विस, मुरादाबाद की निर्यातक श्रीमती तान्या भाटिया बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर बोलीं, यह आम धारणा है कि एक आम महिला के दैनिक कर्तव्यों की तुलना एक सफल उद्यमी की गतिविधियों से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, एक सफल उद्यमी को सदैव सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि सरकार की ओर से महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने हेतु चलाई जा रही योजनाओं के विषय में जानकारी कैसे हासिल करें।

एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने डब्ल्यूईडीपी के उद्घाटन सत्र पर बोलते हुए कहा, उद्यमियों के रूप में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति ने देश के व्यापार और आर्थिक विकास की तस्वीर कुछ बदली है, लेकिन महिला उद्यमियों की संख्या सारे प्रयासों के बाद भी कम है। इसे बढ़ाने के लिए सरकारी और हमारे विद्यालय- एफओईसीएस के स्तर पर भी यथा संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अनेक सफल महिला उद्यमियों- वन्दना लूथरा, राधा भाटिया, शिखा शर्मा और इंदिरा नूई के प्रेरणादायक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों उत्साहवर्धन किया। उल्लेखनीय है, एफओईसीएस यह डब्ल्यूईडीपी नेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंटरप्रिन्योरशिप डवलपमेंट बोर्ड-एनएसटीईडीबी, डिपार्मेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी- डीएसटी और मिनिस्ट्री ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वित्तीय सहयोग से करा रहा है।

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