नई दिल्ली, जून 02: देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर के बीच सभी राज्यों में कोरोना वैक्सीन की कमी देखी जा रही है। कई राज्यों में वैक्सीन का होने के कारण 18 से 44 वर्ष के लोगों का टीकाकरण रूका हुआ है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 18 से 44 साल के लोगों के लिए केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना की है। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को मुफ्त टीकाकरण और उससे नीचे की उम्र के लोगों के लिए भुगतान प्रणाली देने की केंद्र की नीति ‘प्रथम दृष्टया मनमाना और तर्कहीन’ है।
वहीं ग्रामीण लोगों के लिए वैक्सीन खुराक की कमी के संदर्भ में कई अन्य खामियों को चिह्नित करते हुए अदालत ने केंद्र से अपनी टीकाकरण नीति की समीक्षा करने और 31 दिसंबर 2021 तक टीकों की अनुमानित उपलब्धता का रोडमैप रिकॉर्ड करने के लिए कहा है। अब अदालत 30 जून को फिर से इस मामले की सुनवाई करेगी। अपने पक्ष में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह इस साल दिसंबर तक योग्य आबादी का टीकाकरण करेगी।
टीकाकरण के मुद्दे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए अदालत ने कहा कि वर्तमान में 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लोग न केवल संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि संक्रमण के गंभीर प्रभावों से पीड़ित भी हैं। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में मृत्यु भी हो रही है।
जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, एलएन राव और एस रवींद्र भट ने अपने आदेश में कहा कि हालांकि वैज्ञानिक आधार पर विभिन्न आयु समूहों के बीच प्राथमिकता को बरकरार रखा जा सकता है। महामारी की बदलती प्रकृति ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जहां इस कम आयु वर्ग को भी टीकाकरण की आवश्यकता है।


























