उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में एस्मा लागू कर दिया है. जिसके बाद शिक्षक संगठनों की ओर से इसका विरोध शुरू हो गया है। संगठनों की ओर से सरकार पर शिक्षकों और कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कोरोना महामारी के दौर में सरकार के साथ खड़े होने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाज को अब दबाया जा रहा है।

उत्तर प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रचार मंत्री एवं कर्मचारी-शिक्षक-अधिकारी पेंशनर्स मंच के जिला अध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि उ0प्र0 सरकार द्वारा प्रदेश में तीसरी बार एस्मा लगाकर कर्मचारियों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई है। इस कोरोना महामारी में हमारे 1621 शिक्षक पहले ही जान गवां चुके हैं जिस पर शासन कोई हितकारी निर्णय नहीं ले पाया है। अपनी जान हथेली पर रख कर प्रदेश में जनता की सेवा कर रहे शिक्षक एवं कर्मचारियों के साथ शासन द्वारा छल कपट किया जा रहा है उनकी मांगो का समाधान करने के बजाय उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। शासन अपने इस निर्णय पर पुनः विचार करे
जिला सह संयोजक उदयवीर सिंह यादव का कहना है कि शिक्षकों की ओर से किसी मुद्दे को लेकर हड़ताल की सूचना दिए जाने पर सरकार द्वारा इस तरह का निर्णय गलत है। रसरकार इस कठोर कानून को वापस ले और संगठनों के साथ वार्ता करके उनकी समस्याओं का हल निकालने का प्रयास करें।
कोरोना महामारी में योगी सरकार UP में कोविड-19 पर काबू पाने के लिए कई सफल प्रयास कर रही है।इसी के साथ योगी सरकार ने कई नए नियम और कानून लागू किए है। कोरोना महामारी के बीच यूपी में सरकारी कर्मचारियों की कई यूनियनें अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की तैयारी कर रही हैं। वहीं यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश में एस्मा कानून लागू कर दिया है।
छः महीने के लिए लगाया एस्मा
सूत्रों के अनुसार सरकार ने फिलहाल 6 महीने के लिए एस्मा लगाया है। जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। वहीं हालात ठीक होते देख इसे 6 महीने से पहले वापस भी लिया जा सकता है। इस कानून के लागू हो जाने के बाद राज्य में अति आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मचारी छुट्टी एवं हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। सभी अति आवश्यक कर्मचारियों को सरकार के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। जो कर्मचारी आदेशों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
क्या है एस्मा कानून
बताते चलें कि संकट की घड़ी में कर्मचारियों की हड़ताल को रोकने के लिए वर्ष 1968 में एस्मा कानून बनाया गया था। यह भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियम है। एस्मा लागू करने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को समाचार पत्रों या अन्य माध्यमों से सूचित किया जाता है। किसी राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा यह कानून अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है. इस कानून के लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो उनका यह कदम अवैध और दंडनीय की श्रेणी में आता है।एस्मा कानून का उल्लंघन कर हड़ताल पर जाने वाले किसी भी कर्मचारी को बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है।


























