पीलीभीत शहर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे हाजी रियाज़ अहमद को 24 अप्रैल (शनिवार) को कोरोना संक्रमण के चलते जिला अस्पताल स्थित एल-टू अस्पताल में भर्ती कराया गया था।जिसके बाद उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहांं उनका इलाज चल रहा था।इलाज से सुधार हो रहा था, लेकिन बुधवार की रात अचानक उनका निधन हो गया था।पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद के निधन के बाद उनकी बेटी रुकैया ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। उन्हें दो दिन पहले ही बरेली के ही एक दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी हालत में काफी सुधार था।

जिला पंचायत के वार्ड सदस्य पद के लिए उनकी बेटी रुकइया और दामाद मोहम्मद आरिफ अलग अलग सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में हाजी रियाज क्षेत्र के गांवों का भ्रमण कर रहे थे। इस दौरान उन्हें पहले बुखार की शिकायत हुई थी।इस पर उन्होंने अपनी और परिवार के लोगों की कोरोना जांच कराई थी।जिसमें वह खुद और उनकी बेटी रुकइया पॉजिटिव आई थीं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद और उनकी बेटी रुकैया आरिफ एक साथ संक्रमित हुए थे और दोनों को एक साथ ही यहां जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उनको बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली में पांच दिन पहले हाजी रियाज अहमद का इंतकाल हो गया।
उम्मीद जताई जा रही थी कि वह शीघ्र ही स्वस्थ होकर वापस लौट आएंगी। आज दोपहर अचानक रुकैया की तबीयत काफी बिगड़ी और पंद्रह मिनट के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही पीलीभीत में शोक की लहर दौड़ गई। काफी संख्या में लोग बरेली के लिए रवाना हो गए। एक सप्ताह के भीतर हाजी रियाज अहमद और उनकी बेटी के निधन से पूरा जिला स्तब्ध है।
हाजी रियाज अहमद की सरपरस्ती में रुकैया आरिफ ने सियासत शुरू की और जिला पंचायत सदस्य बनीं। सपा की सरकार बनी तो वह जिला पंचायत अध्यक्ष भी चुनी गईं। इस समय भी वह जिला पंचायत का चुनाव लड़ रही थीं। रियाज अहमद के बाद रुकैया आरिफ को ही उनका सियासी वारिस माना जा रहा था लेकिन कोरोना के कहर ने इस दिग्गज नेता के परिवार को आंसुओं के सैलाब में डुबो दिया है। पूरे जिले में शोक की लहर है।


























