हाइलाइट्स:
- हिंदी के जानेमाने गीतकार डॉ कुंवर बेचैन (78) का गुरुवार को कोरोना के चलते निधन हो गया
- कुंवर बेचैन और उनकी पत्नी कुछ दिनों से कोरोना से पीड़ित थे, उनका दिल्ली के अस्पताल में इलाज चल रहा था
- बाद में कवि कुमार विश्वास के ट्वीट के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया था
- बदायूँ से था उनका गहरा नाता, स्व0उर्मिलेश शंखधर के थे अजीज मित्र
- दो साल पहले सोनरूपा के बुलावे पर आए थे बदायूँ
- अक्षत अशेष व सोनरूपा से था बिशेष स्नेह
- 2008 में उन्हें डॉ उर्मिलेश की स्मृति में गीत श्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया था
78 साल के कुंअर बेचैन कुछ समय से कोरोना से पीड़ित थे। कुमार विश्वास के प्रयासों के बाद उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल में वेंटिलेटर मिला था। कुंअर बेचैन की पत्नी भी कोरोना से जूझ रही हैं।
कुंअर बेचैन यूपी के मुरादाबाद जिले के उमरी गांव के रहने वाले थे। उनकी पढ़ाई चंदौसी के एसएम कॉलेज में हुई थी। कुंअर बेचैन ने गीत, गजल और उपन्यास लिखे थे। उनका नाम था डॉ कुंअर बहादुर सक्सेना, लेकिन वह ‘बेचैन’ उपनाम से रचनाएं लिखते थे।
हिंदी साहित्य के बड़े कवि और गीतकार डा. कुंवर बेचैन के निधन से बदायूँ में भी शोक की लहर दौड़ गई,हिंदी साहित्य के गीत शिरोमणि और बहुत जिंदादिल सरल ह्रदय इंसान कुंवर बेचैन के दुखद निधन पर बदायूँ क्लब एवं डॉ उर्मिलेश जनचेतना समिति के सचिव डॉ अक्षत अशेष ने दुख व्यक्त किया है , उन्होंने बताया कि श्री कुंवर बेचैन और उनके पिता के बहुत ही करीबी दोस्त थे, वो पिता के निमंत्रण पर विगत 50 बर्षों में अनेक बार बदायूँ आ चुके हैं ।उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि दो वर्ष पहले मेरी बड़ी बहिन डॉ सोनरुपा विशाल की पुस्तक के विमोचन और कवि सम्मेलन में वो अंतिम बार बदायूं आये थे। एक साल पहले डॉ उर्मिलेश के पुण्यतिथि पर बनी श्रद्धांजलि वीडियो में भी उन्होंने अपनी स्मृतियों को याद करा था। बदायूँ महोत्सब में वर्ष 2008 में उन्हें डॉ उर्मिलेश की स्मृति में गीत श्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया था, वे हिंदी गीत विधा के वरिष्ठ गीतकार थे, वे अपने गीतों की विशेष शैली, व्यक्तित्व और बोलने के सरल लहज़े के कारण भी चर्चित थे। बदायूं के लोग उन्हें बहुत चाहते हैं, उनकी कमी आने वाले समय में पूरी नहीं की जा सकती। अफसोस करोना ने एक बडे कवि को हमसे छीन लिया।ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति।स्वदेश केसरी परिवार भी उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है।






























