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अमित शाह की रणनीति ने जाटों में बदला माहौल,सपा खेमे में खलबली,10 मार्च के फैसले से पहले ही नई रणनीति तैयार,

मुजफ्फरनगर। केन्द्र सरकार में गृह व सहकारिता मंत्री गृहमंत्री अमित शाह के दौरों के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की जाट समुदाय से जुगलबंदी और गहराने लगी है। अमित शाह अभी तक मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बुलंदशहर, कैराना और शामली में जनसंपर्क के माध्यम से पार्टी की बातों को लोगों के सामने रख चुके हैं।

जानकारों की माने तो इस क्षेत्र में शाह ने जाट समुदाय को जिस तरह सहलाया, थपथपाया और खुद को उनके बीच के ही आदमी की तरह खड़ा किया, उसके चलते तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। नाराजगी धुलती नजर आ रही है और पुराना विश्वास बुलंद होता महसूस हो रहा है। परिणाम चाहे जो भी हो लेकिन एक बात सभी मान रहे हैं कि जाटों पर मजबूती से डोरे डालकर भाजपा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गठबंधन के लिए राह कठिन कर दी है।

भाजपा ने सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशियों को लेकर सिंबल द्वंद्व में फंसे जाट मतदाताओं को अपने खेमे में करने के लिए पहले चरण के मतदान से लिए जाट नेताओं की पूरी फौज उतार दी है। बात मुजफ्फरनगर की करें तो यहां की छह में से पांच विधानसभा सीटों पर रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ा जा रहा है। इन पांच सीटों में चार पर सपा के नेताओं को टिकट दिया गया। सपा के कोर वोट बैंक मुस्लिम के साथ रालोद के परंपरागत वोटर जाट के गठजोड़ के लिए उठाया गया यह कदम गठबंधन के लिए ही कठघरा बन गया। जाट मतदाताओं में संशय गहरा गया कि वह अपना वोट रालोद नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी को देंगे। इनका यही संशय विरोध की वजह बनता दिखा। गठबंधन के इस फार्मूले से भारतीय जनता पार्टी को भी कहीं न कही यह शंका हुई कि 2014, 2017 और 2019 में उसकी जीत का आधार बने जाट मतदाताओं को अपने पक्ष में किए रखना बेहद जरूरी है। महत्वपूर्ण काम को अमित शाह ने आगे बढ़ाया।

कैराना में पलायन मुद्दा उठाने के साथ शाह ने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र कर सतर्क किया कि यदि चूके तो आपके साथ फिर घात हो सकता है। कैराना के बाद अपने मुजफ्फरनगर दौरे के दौरान शाह ने प्रभावी मतदाता सम्मेलन में जहां पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का गुणगान किया, वहीं जाट भूमि को वीरभूमि की संज्ञा देकर खूब तालियां बटोरीं। इतना ही नहीं, मुजफ्फरनगर दंगे की याद दिलाकर अमित शाह ने केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान और संगठन के सहारे यह अहसास भी करवा दिया कि मुकदमों की मुसीबत के वक्त में जाटों के साथ भारतीय जनता पार्टी ही खड़ी थी।

जाटों का कहना है कि विपदा के समय जाट समाज को पिछली सरकारों ने भुला दिया था। पिछली सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति का जाट समाज को दंश झेलना पड़ा था। देश के गृहमंत्री आज जाट समाज के बीच जाकर सुरक्षा की गारंटी दे रहे हैं। जितना सम्मान आज जाट समाज को मिला है, उतना कभी नहीं मिला।

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