होम राज्य उत्तर प्रदेश कच्ची शराब लीवर, फेफड़ों, हार्ट और मस्तिष्क की दुश्मन : सिंह

कच्ची शराब लीवर, फेफड़ों, हार्ट और मस्तिष्क की दुश्मन : सिंह

टीएमयू के फोरेंसिक विभाग की ओर से कच्ची और मिलावटी शराब पर वेबिनार

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल एंड साइंसेज में फोरेंसिक साइंस विभाग की ओर से कच्ची और मिलावटी शराब के मानव सेहत पर दुष्प्रभाव पर आयोजित वेबिनार में विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय की फैकल्टी श्री महिपाल सिंह सॉख्ला ने कहा, मिलावटी शराब गन्ने के रस, चावल का पानी आदि को सड़ाकर बनाई जाती है। इसके जानलेवा दुष्परिणाम होते हैं। यह शराब पीने से लीवर सड़ सकता है। मिलावटी शराब से लीवर, फेफड़े, ह्रदय, मस्तिष्क सिकुड़ने लगते हैं। आंतों में सूजन, जलन और पाचन मंद पड़ जाता है। इससे पूर्व फोरेंसिक साइंस के एचओडी श्री रवि कुमार ने अतिथि का स्वागत किया। वेबिनार में 80 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

श्री सॉख्ला ने मिलावटी शराब के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा, गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं के शराब सेवन से शिशु में अंग विकृति और मानसिक विक्षिप्तता हो सकती है। कच्ची शराब शरीर में बनने वाले हार्मोन्स और अन्य प्रकार के द्रव्यों के स्त्राव को रोकती और सोख देती है। श्री सिंह ने बताया, पोस्टमार्टम में मिलावटी शराब गंध, अंदरूनी अंगों की सुकड़ी हुई अवस्था और आंतों की सड़न से चिन्हित कर ली जाती है। इसके साथ अलक्लाइजर, एक्स-रे फ्लोरोसेंट एनर्जी, डिस्पर्सिया स्प्रेक्टोलॉजी, गैस क्रोमोटोग्राफी आदि वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए भी शरीर में शराब का पता लगाया जा सकता है, किसी व्यक्ति ने किस तरह की और कितनी मात्रा में शराब पी है। वेबिनार में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार, श्री आकाश चौहान, चिन्तकायाल पूर्णिमा, श्री नवरीत बूरा, श्री सतेंद्र सचान, श्री सागर, श्री हिमांशु यादव आदि मौजूद रहे।

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