नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छिड़े भारी जनाक्रोश, हिंसक प्रदर्शनों और जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी अनशन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।लेकिन शिक्षा मंत्री के इस देर से आए फैसले पर अब सीधा सवाल खड़ा हो रहा है—“अगर यही फैसला 36 दिन पहले ले लिया गया होता, तो क्या देश को इस अराजकता, हिंसा और छात्रों के दर्द से नहीं बचाया जा सकता था?”
बड़ा सवाल: 36 दिन पहले इस्तीफा देते तो क्या-क्या बच जाता?
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों की सड़कों तक पिछले एक महीने में जो मंजर देखने को मिला, उसने पूरी सरकार की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आज हर तरफ से यही तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं:
- सड़कों पर अराजकता और मारपीट क्यों हुई? अगर सरकार शुरुआत में ही जवाबदेही तय कर देती, तो सड़कों पर उतरने के लिए छात्रों को मजबूर नहीं होना पड़ता और न ही आंदोलन के दौरान पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें होतीं।
- छात्रों को क्यों करना पड़ा उग्र आंदोलन? जिन युवाओं को अपने कमरों में बैठकर पढ़ाई करनी चाहिए थी, वे भीषण गर्मी में 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर सड़कों पर बैठने और भूख हड़ताल करने को मजबूर हुए। कई बेकसूर छात्रों को इस तनाव के चलते अपनी जान तक गंवानी पड़ी।
- सरकार की साख पर लगा बट्टा: 36 दिनों तक लगातार लीपापोती करने और मामले को टालने की कोशिशों के बाद इस्तीफा देने से सरकार की मंशा और विश्वसनीयता पर गहरे सवाल उठ चुके हैं।
“इस्तीफा देकर धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के हित की दुहाई तो दी है, लेकिन सवाल वही है कि जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया, कई जानें चली गईं और पूरे देश में बवाल मच गया, तब जाकर सरकार की नींद क्यों खुली?”
जंतर-मंतर पर संग्राम और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की जीत का दावा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से डटे प्रदर्शनकारियों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का बड़ा बयान सामने आया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे “कॉकरोचों की जीत” बताया है।
ज्ञात हो कि जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे। संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला।NTA पर गिरी गाज: 47 अफसर बर्खास्त
इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार रात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर बड़ी कार्रवाई की गई:
- NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात कही गई है।
- इससे पहले शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को भी बदला जा चुका है।
- सरकार अब आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने और NTA में तकनीकी सुधार लागू करने का दावा कर रही है।
क्या लिखा धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चिट्ठी में?
प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यथित किया है। उन्होंने लिखा:
“यह मेरे व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। मैं नहीं चाहता कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव में उलझे, इसलिए मैं पद छोड़ रहा हूँ।”CBI जांच जारी, अब तक 13 गिरफ्तार
3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द कर दोबारा करानी पड़ी थी। फिलहाल मामले की जांच CBI कर रही है। दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और CBI जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने वाली है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या सिर्फ एक इस्तीफे से उन लाखों छात्रों का मानसिक तनाव और देश में फैली 36 दिनों की अराजकता की भरपाई हो पाएगी?


























