सहसवान। विद्युत वितरण उपखंड सहसवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 4 जुलाई 2026 को प्रकाशित समाचार “लापरवाही की हद, तीन दिन से टूटे पड़े तार की किसी ने नहीं ली सुध” का आधिकारिक रूप से खंडन किया है। विभाग का कहना है कि समाचार में लगाए गए आरोप तथ्यहीन, भ्रामक और वास्तविक परिस्थितियों से परे हैं।

उपखंड अधिकारी सहसवान द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, विभाग की त्वरित जांच में स्पष्ट हुआ कि घटना गांव नैथुआ स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर के भीतर हुई थी। विभाग का कहना है कि किसी भी सरकारी अथवा निजी संस्थान के परिसर के अंदर की आंतरिक विद्युत वायरिंग, तारों और उपकरणों के रखरखाव एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होती है, न कि विद्युत वितरण विभाग की।

विभाग के अनुसार विद्यालय के शिक्षक शकूर अहमद अंसारी ने जांच के दौरान बताया कि घटना वाले दिन बड़ी संख्या में बंदर विद्यालय परिसर में आए थे और उन्हीं के कारण विद्युत तार टूट गया। विभाग ने इसे एक आकस्मिक प्राकृतिक घटना बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति का पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं था।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि तार टूटने की जानकारी बच्चों द्वारा शिक्षकों को दिए जाने के बावजूद विद्यालय प्रशासन ने बच्चों को उस स्थान से दूर रखने अथवा समय रहते विद्युत विभाग को इसकी मौखिक या लिखित सूचना देने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए।

उपखंड अधिकारी ने कहा कि विद्युत विभाग अपनी मुख्य लाइनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विद्युत व्यवस्था के रखरखाव के लिए निरंतर तत्पर रहता है। चूंकि यह घटना विद्यालय परिसर के अंदर हुई और इसकी प्रकृति आकस्मिक थी, इसलिए इस मामले में विद्युत विभाग को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

विभाग ने एक दैनिक समाचार पत्र (स्वदेश केसरी न्यूज नहीं) मे प्रकाशित समाचार में विभाग पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों का वह पूरी तरह से खंडन किया है।

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