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कल लगेगा 2020 का अंतिम सूर्य ग्रहण, इस बार होगा पूर्ण ग्रहण आखिरी और दूसरा सूर्य ग्रहण

रजत गुप्ता (Director-Media & Marketing) की रिपोर्ट

भारत में यह नहीं देखा जा सकेगा और शेष दुनिया के भी कुछ ही हिस्सों में दिखेगा।

भारतीय समयानुसार इस ग्रहण का समय शाम 7 बजकर 3 मिनट से आरंभ होगा और इसकी समाप्ति मध्‍यरात्रि में यानी 15 दिसंबर की रात 12 बजकर 23 मिनट पर होगी। इस ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे की रहेगी। तिथि अनुसार यह ग्रहण अगहन कृष्‍ण अमावस्‍या को घटित होगा। यह खंडग्रास प्रकार का ग्रहण होगा एवं यह भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसकी धार्मिक एवं ज्‍योतिष मान्‍यता नहीं है।विदेशोंं में पूर्ण ग्रहण की अवधि सुबह 9ः43 बजे से 9ः45 बजे के बीच दो मिनट दस सेकंड की होगी। पूर्ण ग्रहण के दौरान सूर्य के कोरोना के अध्ययन के लिहाज से यह घटना खगोल विज्ञानियों के लिए अहम होनी जा रही है। आर्यभटट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान नैनीताल (एरीज) के वरिष्ठ सौर विज्ञानी डा. वहाबउददीन के अनुसार सूर्य के कोरोना के आज भी कई गुत्थियां हैं, जिन्हें अभी तक समझा नही जा सका है। ऐसे मौकों का सौर विज्ञानियों को इंतजार रहता है और इस बार भी विज्ञानी तैयारी में हैं।एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी के मुताबिक सूर्य का तापमान छह हजार डिग्री सेल्सियस होता है। जबकि सूर्य के कोरोना का तापमान लाखों डिग्री सेल्सियस में होता है। यह कोरोना पृथ्वी की ओजोन लेयर की भांति ही सूर्य के एक आवरण की तरह होता है और पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान ही स्पष्ट नजर आता है।

सूर्य ग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसे लेकर धर्म और विज्ञान की अपनी मान्‍यताएं हैं। ग्रहण के दौरान हमें कुछ सावधानियों का पालन करना चाहिये। ग्रहण काल के समय हमें भोजन नहीं करना चाहिये, ना ही नींद निकालना चाहिये। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भोजन, नींद सहित अन्‍य कार्यों को लेकर हमारी दिनचर्या कैसी होना चाहिये, आइये जानते हैं।

ग्रहण के दौरान सबसे ध्‍यान रखने योग्‍य बात यह है कि नींद नहीं लेना चाहिये। कहा जाता है कि इस दौरान सोने वालों के घर एवं कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अगर कोई व्‍यक्ति शरीर पर सुंगधित इत्र, तेल या परफ्यूम का छिड़काव करता है तो उसे त्‍वचा संबंधी रोग उत्‍पन्‍न होने का भयर होता है। ग्रहण के सूतक के दौरान भोजन करना पूरी तरह से निषेध है।

यदि किसी कारण से यह आवश्‍यक है तो आप यह पूरा ध्‍यान रखें कि भोजन के दौरान स्‍वच्‍छता व पवित्रता भंग ना हो। ग्रहण काल शुरू होने एवं समापन के बाद अगर संभव हो तो शुद्ध जल से स्‍नान करें। अगर आपके पास किसी पवित्र नदी का जल है तो यह उत्‍तम है। यह जल गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, मानसरोवर, तापी, बिंदु सरोवर आदि धार्मिक दृष्टि से पवित्र नदियों व जल संरचना का होना चाहिये।

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