- गुटबाजी करने वालों की पार्टी में जगह नहीं- शिवपाल यादव
- संगठन की मजबूती के लिए हो रहा मंथन
- रविंद्र मोहन सक्सेना के संचालन ने बांधा माहौल







बदायूं। समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक एकता और गुटबाजी पर अंकुश लगाने के मिशन के तहत पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को बदायूं जिले के दो दिवसीय दौरे की शुरुआत की।
उन्होंने दहगवां चौराहे पर विधायक ब्रजेश यादव के “राव फार्मस होटल एंड बैंक्वेट हॉल” का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित भव्य जनसभा में हजारों की भीड़ उमड़ी, जहां शिवपाल यादव ने साफ शब्दों में कहा —“गुटबाजी करने वालों की पार्टी में कोई जगह नहीं, संगठन को मजबूत करने के लिए सभी फ्रंटल संगठनों को भंग किया गया है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मकसद अब यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी 2027 के मिशन के लिए एकजुट होकर मैदान में उतरे।
इस मौके पर सांसद आदित्य यादव, राष्ट्रीय महासचिव सलीम इकबाल शेरवानी, जिलाध्यक्ष आशीष यादव, पूर्व राज्यमंत्री ओमकार सिंह यादव, पूर्व विधायक आर.के. शर्मा, भूपेंद्र सिंह, राम खिलाड़ी यादव, और सुरेशपाल सिंह चौहान,उझानी के उद्योगपति रजनीश गुप्ता समेत जिलेभर के नेता मौजूद रहे।
संचालन में चमके रविंद्र मोहन सक्सेना- शब्दों की ऊर्जा से बांधा माहौल

कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी विशेष रूप से बदायूं के रविंद्र मोहन सक्सेना को सौंपी गई थी।उनकी अद्भुत वाणी, अनुशासित लय और जोशपूर्ण अंदाज़ ने जनसभा को जीवंत बना दिया।
राजनीतिक मंचों से लेकर प्रशासनिक मंचों से लेकर साहित्यिक सभाओं तक, सक्सेना की संचालन शैली हमेशा से प्रशंसा बटोरती रही है-लेकिन इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने शब्दों से जो वातावरण बनाया, उसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।सांसद, विधायक और कार्यकर्ताओं तक ने उनके संचालन की सराहना की।
उझानी में रजनीश गुप्ता के निवास पर पहुंचे शिवपाल सिंह





अपने व्यस्तम दौरे मे से समय निकाल कर शिवपाल सिंह ने रजनीश गुप्ता के निवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की।हालांकि यह एक व्यक्तिगत भेंट थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे पुराने पारिवारिक रिश्तों की मज़बूती के रूप में देखा जा रहा है।
रजनीश गुप्ता लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं और मुलायम सिंह यादव (नेताजी) के बेहद करीबी रहे हैं।
नेताजी के समय से ही गुप्ता परिवार का पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से गहरा आत्मीय संबंध रहा है।भले ही उन्हें अब तक कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक पद न मिला हो, लेकिन संगठन में उनका सम्मान और जुड़ाव अटूट रहा है।
शिवपाल-से लेकर धर्मेंद्र यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं का उनसे जुड़ाव यह साबित करता है कि यह संबंध आज भी उतने ही मजबूत और भावनात्मक हैं, जितने नेताजी के दौर में थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में रजनीश गुप्ता के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, और सपा में उनके योगदान को अब उचित सम्मान मिलने की संभावना बढ़ गई है।
संगठनात्मक एकता की ओर सपा का कदम
शिवपाल यादव का यह दौरा केवल उद्घाटन या शिष्टाचार मुलाकातों तक सीमित नहीं था — बल्कि यह सपा के भीतर नए सिरे से मंथन और पुनर्गठन की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व अब यह संदेश देना चाहता है कि-“संगठन में गुटबाजी नहीं, एकजुटता की जरूरत है।”


























