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Maratha Reservation Activist Jaranga health Update 5th day of his fast. | अनशन के 5वें दिन जरांगे की तबीयत बिगड़ी: सरकार ने मराठा आरक्षण के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया

मुंबई42 मिनट पहले

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मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने जालना में 9 फरवरी से अनशन शुरू किया था। 5 वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। उनकी नाक से खून आने लगा। - Dainik Bhaskar

मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने जालना में 9 फरवरी से अनशन शुरू किया था। 5 वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। उनकी नाक से खून आने लगा।

मराठा आरक्षण को लेकर मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पिछले 5 दिन से जालना के अपने गांव अंतरवाली सराटी में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार पांचवें दिन कुछ न खाने के चलते उनकी बुधवार (14 फरवरी) को तबीयत बिगड़ गई। उनकी नाक से खून आने लगा।

बिगड़ती तबीयत को देखते हुए जरांगे को डॉक्टरों ने नींद में दवाई दी। जब उन्हें इस बारे में पता चला तो वे नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मेरा इलाज करना चाहती है, तो 2 दिन के अंदर आरक्षण को लागू करें। अगर ऐसा नहीं किया तो वे फिर से मुंबई तक मार्च निकालेंगे और प्रोटेस्ट करेंगे। तब तक PM मोदी की राज्य में कोई सभा भी नहीं होने देंगे।

उधर, महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया है। बुधवार (14 फरवरी) को सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि यह सत्र 20 फरवरी को बुलाया जाएगा। इसमें मराठा आरक्षण को लेकर चर्चा होगी।

जरांगे बोले- महाराष्ट्र में मोदी की सभा नहीं होने देंगे
जरांगे ने भूख हड़ताल के दौरान बुधवार को कहा- अगर हमारी मांगें नहीं मानी गई तो प्रधानमंत्री मोदी की महाराष्ट्र में कोई भी सभा या रैली नहीं होने देंगे। उधर, नारायण राणे ने जरांगे के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा- जरांगे ने अब लिमिट क्रॉस कर दी है। उन्होंने बहुत ही हल्का बयान दिया है। मैं उनको चुनौती देता हूं कि जब मोदी महाराष्ट्र आएंगे तब वे अपनी जगह से हिल कर दिखाए। मैं उनको मराठाओं का नेता नहीं मानता।

कुनबी समुदाय कौन हैं?
कुनबी, कृषि से जुड़ा एक समुदाय है, जिसे महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की कैटेगरी में रखा गया है। कुनबी समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण लाभ का मिलता है। महाराष्ट्र कैबिनेट ने पिछले महीने फैसला किया था कि मराठवाड़ा क्षेत्र के उन मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे जिनके पास निजाम युग के रेवेन्यू और एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स मौजूद हैं, और जिनमें उन्हें कुनबी लिखा गया हो।

27 जनवरी को मुंबई में CM शिंदे ने तुड़वाया था अनशन

महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे शनिवार को नवी मुंबई पहुंचे। उन्होंने जरांगे को गले लगाया और जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया।

महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे शनिवार को नवी मुंबई पहुंचे। उन्होंने जरांगे को गले लगाया और जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया।

इससे पहले मनोज जरांगे ने 20 जनवरी से 26 जनवरी तक जालना से नवी मुंबई तक यात्रा निकाल थी। इसके बाद वे अनशन पर बैठ गए थे। 27 जनवरी को सीएम एकनाथ शिंदे ने म​​​नोज जरांगे को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया था और मराठा आंदोलन से जुड़े ड्राफ्ट अध्यादेश की कॉपी सौंपी थी। आंदोलन खत्म करने के बाद जरांगे ने कहा था कि हम 4 महीने से मराठा आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे थे।

मनोज का कहना था- मराठा आरक्षण के लिए करीब 350 युवाओं ने आत्महत्या की। आज उनका सपना साकार हुआ। अब सरकार पर आरक्षण लागू करने की जिम्मेदारी है। अगर इस बार धोखा हुआ तो मैं मुंबई के आजाद मैदान आ जाऊंगा। पढ़ें पूरी खबर…

मराठा आरक्षण का इतिहास…
मराठा खुद को कुनबी समुदाय का बताते हैं। इसी के आधार पर वे सरकार से आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसकी नींव पड़ी 26 जुलाई 1902 को, जब छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति शाहूजी ने एक फरमान जारी कर कहा कि उनके राज्य में जो भी सरकारी पद खाली हैं, उनमें 50% आरक्षण मराठा, कुनबी और अन्य पिछड़े समूहों को दिया जाए।

इसके बाद 1942 से 1952 तक बॉम्बे सरकार के दौरान भी मराठा समुदाय को 10 साल तक आरक्षण मिला था। लेकिन, फिर मामला ठंडा पड़ गया। आजादी के बाद मराठा आरक्षण के लिए पहला संघर्ष मजदूर नेता अन्नासाहेब पाटिल ने शुरू किया। उन्होंने ही अखिल भारतीय मराठा महासंघ की स्थापना की थी। 22 मार्च 1982 को अन्नासाहेब पाटिल ने मुंबई में मराठा आरक्षण समेत अन्य 11 मांगों के साथ पहला मार्च निकाला था।

उस समय महाराष्ट्र में कांग्रेस (आई) सत्ता में थी और बाबासाहेब भोसले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। विपक्षी दल के नेता शरद पवार थे। शरद पवार तब कांग्रेस (एस) पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने आश्वासन तो दिया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए। इससे अन्नासाहेब नाराज हो गए।

अगले ही दिन 23 मार्च 1982 को उन्होंने अपने सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद राजनीति शुरू हो गई। सरकारें गिरने-बनने लगीं और इस राजनीति में मराठा आरक्षण का मुद्दा ठंडा पड़ गया।

OBC समुदाय मराठाओं को कुनबी सर्टिफिकेट देने के खिलाफ
मराठा समुदाय को अलग से आरक्षण देने के फैसले को 5 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रद्द किए जाने के बाद से ही मनोज जरांगे पाटिल समेत कई लोग दावा कर रहे हैं कि मराठा समाज मूल रूप से कुनबी जाति से है। यानी मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाण-पत्र दिया जाता है तो आरक्षण मिलने पर उसे OBC कोटे से लाभ मिल जाएगा।

फिलहाल राज्य में OBC कोटे से आरक्षण 19 फीसदी है। OBC समुदाय के संगठनों का मानना ​​है कि अगर इसमें मराठा समुदाय को भी शामिल किया गया तो आरक्षण का फायदा नए लोगों को मिलेगा। हमारा विरोध मराठा आरक्षण से नहीं बल्कि उन्हें OBC से आरक्षण देने को लेकर है।

पिछले आंदोलन के दौरान 9 दिन में 29 लोगों ने सुसाइड किया
इससे पहले 25 अक्टूबर 2023 को मनोज जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में भूख हड़ताल शुरू की थी। मांग वही, मराठा समुदाय को OBC का दर्जा देकर आरक्षण दिया जाए। 9 दिनों में आंदोलन से जुड़े 29 लोगों ने सुसाइड कर लिया।

इसके बाद राज्य सरकार के 4 मंत्रियों धनंजय मुंडे, संदीपान भुमरे, अतुल सावे, उदय सामंत ने जरांगे से मुलाकात कर भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की थी। उन्होंने स्थायी मराठा आरक्षण देने का वादा किया। इसके बाद 2 नवंबर 2023 को मनोज जरांगे ने अनशन खत्म कर दिया। साथ ही सरकार को 2 जनवरी 2024 तक का समय दिया।

1 नवंबर 2023 को सर्वदलीय बैठक में हुआ था आरक्षण देने का फैसला
महाराष्ट्र में CM एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में 1 नवंबर 2023 को सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने सहमति जताई कि मराठा समुदाय को आरक्षण मिलना ही चाहिए। इस बैठक में शरद पवार समेत 32 पार्टियों के नेता शामिल हुए थे।

बैठक के बाद CM शिंदे ने कहा था- यह निर्णय लिया गया है कि आरक्षण कानून के दायरे में और अन्य समुदाय के साथ अन्याय किए बिना होना चाहिए। आरक्षण के लिए अनशन पर बैठे मनोज जरांगे से अपील है कि वो अनशन खत्म करें। हिंसा ठीक नहीं है।

तब महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने 2 नवंबर 2023 को कहा था कि विधानमंडल सत्र 7 दिसंबर 2023 से शुरू होगा। इस सत्र में 8 दिसंबर को मराठा आरक्षण पर चर्चा की जाएगी।

इसे लेकर जरांगे ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को स्थायी आरक्षण देने का वादा किया है। उन्होंने इसके लिए कुछ समय मांगा है। हम सबकी दिवाली मीठी बनाने के लिए सरकार को समय देंगे। अगर सरकार तय समय में आरक्षण नहीं देगी तो 2024 में हम फिर मुंबई में आंदोलन करेंगे।

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