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Karnataka government 10 thousand crore old loans cag | कर्नाटक सरकार ने पुराने कर्ज की वसूली नहीं की- CAG: रिपोर्ट में 10 हजार करोड़ रुपए की बात, साल 1977 का केस भी पेंडिंग

बेंगलुरु1 घंटे पहले

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कर्नाटक सरकार ने विभिन्न संस्थाओं को दिए गए 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक के पुराने कर्ज की वसूली नहीं की है। मंगलवार (13 फरवरी) को CAG की 2022-23 फाइनेंस रिपोर्ट में विधानसभा में पेश की गई, जिसमें इसका खुलासा हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्ज के कुछ मामले साल 1977 से पेंडिंग हैं। 21 संस्थाओं पर 15856 करोड़ रुपए का बकाया है, जिसमें 9380 करोड़ रुपए का मूलधन भी शामिल है।

सबसे पुराना बकाया 1977 का है, जो बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवेज बोर्ड (BWSSB) और कर्नाटक राज्य बीज निगम लिमिटेड को दिया गया है।

अमित शाह 11 फरवरी को मैसुरु पहुंचे थे। यहां उन्होंने BJP कोर कमेटी की मीटिंग में हिस्सा लिया था।

अमित शाह 11 फरवरी को मैसुरु पहुंचे थे। यहां उन्होंने BJP कोर कमेटी की मीटिंग में हिस्सा लिया था।

CM सिद्धारमैया ने अमित शाह को दी खुली बहस की चुनौती
11 फरवरी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अमित शाह को खुली बहस की चुनौती दी थी। CM सिद्धारमैया ने कहा था कि वे साबित कर सकते हैं कि गारंटी योजनाओं के कारण राज्य का खजाना खाली नहीं है। दरअसल, अमित शाह ने कर्नाटक राज्य सरकार की योजनाओं के चलते राज्य का खजाना खाली होने की बात कही थी।

सिद्धारमैया ने कहा था कि अगर अमित शाह इस पर कायम हैं कि गारंटी योजनाओं के कारण कर्नाटक सरकार का खजाना खाली हुआ है तो मेरे साथ खुली बहस में शामिल हों। मैं साबित कर सकता हूं कि हमारा खजाना खाली नहीं है। उलटा, केंद्र से राज्य में करों का अनुचित वितरण हो रहा है।

उन्होंने कहा था कि भाजपा कर्नाटक में गारंटी योजनाओं को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वे कर्नाटक के लोगों से नफरत रखते हैं। पूरी खबर पढ़ें

CAG की रिपोर्ट पर पश्चिम बंगाल में छिड़ा घमासान

ममता ने कहा था कि CAG के पास लिखने के लिए कोई जानकारी नहीं थी कि क्या नहीं लिखना, यह पूरी तरह से गलत जानकारी है।

ममता ने कहा था कि CAG के पास लिखने के लिए कोई जानकारी नहीं थी कि क्या नहीं लिखना, यह पूरी तरह से गलत जानकारी है।

फरवरी महीने की शुरुआत में CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार में 2 लाख करोड़ के घोटाले हुआ है। पैसे मिलने और काम होने पर एक साल के अंदर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देना होता है। ममता सरकार ने 1.9 लाख करोड़ रुपए का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं दिया है।

BJP नेता सुकांत मजूमदार ने कहा था कि साल 2018 से 2021 तक 2.4 करोड़ का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं दिया। इसमें ग्रामीण विकास, शहरी विकास और शिक्षा मंत्रालय शामिल हैं। इन्हीं विभागों में ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ है। शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोप में पूर्व शिक्षा मंत्री भी जेल में हैं।

ममता ने कहा था- मैं 2003 में सत्ता में थी ही नहीं
CM ममता बनर्जी ने भ्रष्टाचार के आरोप का खंडन करते हुए कहा था कि ऐसा कभी नहीं हुआ। यह 2003 की बात कह रहे है और मैं 2003 में सत्ता में थी ही नहीं? मैं 2011 से जिम्मेदारी लूंगी। सारे प्रमाणपत्र खारिज हैं, यह सरासर झूठ है। 2 लाख करोड़ का स्कैम सरासर बेबुनियाद है।

ममता ने कहा था कि CAG के पास लिखने के लिए कोई जानकारी नहीं थी कि क्या नहीं लिखना, यह पूरी तरह से गलत जानकारी है। यह बीजेपी पार्टी द्वारा लिखा गया था।

ममता ने CAG की रिपोर्ट को झूठा बताते हुए पीएम मोदी को चिट्‌ठी भी लिखी थी। जिसमें ममता बनर्जी ने लिखा कि यदि आप चाहें तो मैं सभी सर्टिफिकेट की कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज सकती हूं।

ममता के अलावा टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी दावा किया कि 2011 में राज्य में TMC के सत्ता में आने के बाद यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा करने में कोई कमी नहीं हुई है। लेकिन हम 2002-03 से 2010-11 की जिम्मेदारी नहीं ले सकते, क्योंकि तब वाम मोर्चा सरकार सत्ता में थी। पूरी खबर पढ़ें

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