- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग का सातवां दिन
महोली (सीतापुर)। श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान का स्वरूप है। श्रीमद्भागवत में भगवान के अवतारों के साथ उनके भक्तों की कथाएं हैं। यह बात कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में आयोजित सत्संग के सातवें दिन स्वामी ओमकारानंद सरस्वती जी ने कही। इस अवसर पर कथा व्यास के पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सात दिवसीय आयोजन के सातवें दिन श्रीमद्भागवत महापुराण पर चर्चा करते हुए महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती के कृपा पात्र शिष्य स्वामी ओमकारानंद सरस्वती ने कहा कि ज्ञानी परमात्मतत्व को प्राप्त कर परम पद को प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि भक्तों की रक्षा करने के लिए और संतों के हित के लिए भगवान अवतार लेते हैं। स्वामी जी ने बताया कि निर्गुण और सगुण में कोई भेद नहीं है। निर्गुण और सगुण रूप की उपासना के लिए ज्ञान और भक्ति दोनों चाहिए। स्वामी जी ने सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष आदि की कथाएं सुनाईं। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर हरिद्वार से आए सर्वेशानंद सरस्वती जी, आश्रम समिति के संरक्षक डाॅ. रामजीदास टंडन, श्रीनाथ बाजपेई, शिवबरदानी लाल शुक्ल, गजानन मिश्रा, केशव मिश्रा, उत्तम गुप्ता, डाॅ. रेनू वर्मा, सरिता गुप्ता, सुषमा मिश्रा, राजवती मिश्रा, अंजली मिश्रा, दिव्या त्रिवेदी, अपर्णा मिश्रा आदि भक्त मौजूद रहे।


























