तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी की ओर से हैंड्स ऑनसेशंस इन ड्राफ्टिंग एंड फिलिंग प्रोसीजर ऑफ़ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर वेबिनार
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने बौद्धिक संपदा अधिकार- आईपीआर को लेकर कहा, पहले हमें आईपीआर के बारे में नहीं पता होता था। विश्व व्यापार संगठन संगठन के बन जाने के बाद इसका महत्वत बढ़ने लगा है, इसीलिए हमें अपने नए अविष्कार को संभाल कर रखना चाहिए और दूसरों के दुरुपयोग से बचाना है। बोले, ग्लोबलाइजेशन के कारण अक्सर नए आविष्कार का श्रेय आविष्कारक को नहीं मिल पाता है I वह बोले, आजकल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स में किस तरह इन्फ्रिंजमेंट को रोका जा सकता है। इन्फ्रिंजमेंट किस तरह किसी भी आविष्कारक के अधिकारों का हनन कर सकता है। आज के दौर में कैसे आविष्कारक अपने अधिकारों को सही से इस्तेमाल कर सकता हैI वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी की ओर से हैंड्स ऑन सेशंस इन ड्राफ्टिंग एंड फिलिंग प्रोसीजर ऑफ़ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे। इससे पूर्व डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी की प्राचार्या डॉ. शिवानी एम कौल ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया।वेबिनार में टीएमयू के साथ -साथ दिल्ली, देहरादून, भोपाल, फर्रुखाबाद और झारखंड विश्वविद्यालयों के फैकल्टी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सवाल-जवाब का दौर भी चला।
बौद्धिक संपदा, एरेनेस कानून की हेड मिस रूचि ने बताया, आईपीआर को कॉपी राइट्स, ट्रेडमार्क्स, पेटेंट्स, डिज़ाइंस और जोग्राफिकल इनडिकेशंस के जरिए सुरक्षित रखा जा सकता है। पेटेंट्स क्या होते हैं? यदि हम पेटेंट फाइल लेते है तो हमारे कुछ मूल अधिकार होते है। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग में लिए गए पेटेंट का भी वर्णन किया, जिसमें बताया, दो प्रकार से कुछ पौधे का पंजीकरण कराए जा सकते हैं। कुछ पंजीकरण नहीं कराए जा सकते हैं। उन्होंने बताया, हम अपने विचारों को किस प्रकार से दूसरों के गलत प्रयोग और इस्तेमाल से बचा सकते हैं। उन्होंने इनफिंजमेंट से बचाव के तरीके भी बताए। भारतीय परिद्श्य के अन्य उदाहरण देते हुए गुजरात राज्य में पेप्सिको और किसानों के मध्य हुए मामलों का भी विस्तार से वर्णन किया। एफडीपी के दूसरे दिन टीएमयू के रजिस्ट्रार डा. आदित्य शर्मा बतौर अतिथि बोले, आईपीआर वक्त की जरुरत है। भारतीय बौद्धिक सम्पदा से कमरसिलाइज़ेशन, रिसर्च, इनोवेशन और इन्वेंशन को बढ़ावा मिलता है। पेटेंट फाइलिंग के बाद करिकुलम और अपडेट हो जाता है। पेटेंट मिलने से न केवल यूनिवर्सिटी का नाम होता है बल्कि यूजीसी आदि से फंडिंग मिलने में आसानी हो जाती है। ऐसे वेबिनार से फैकल्टी की हौसला अफजाई होती है।
लॉ फार्म- फॉर सीइंग आईपी के मैनेजिंग पार्टनर श्री अतुल रमन बोले, पेटेंट एक विशेष अधिकार है। उन्होंने पेटेंट लॉ ऑफ़ इंडिया और पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने पेटेंट की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, पेटेंट दो प्रकार का होता है- डिजाइन और प्रॉजेक्ट पेटेंट। उन्होंने फ्लो चार्ट के जरिए ड्राफ्टिंग, फाइलिंग और पेटेंट अवार्डिंग तक के सभी तरीके बताए। वेबिनार के दौरान अतिथि श्री प्रतीक श्रीवास्तव के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी के डॉ. फरहान खान, डॉ. शीतल मल्हान, डॉ. असमा आजम, डॉ. वेवक स्वरुप, डॉ. गौरव दीक्षित, डॉ. कोमल नागर , डॉ. उज्मा सैयद, डॉ. अंकिता सक्सेना, डॉ. कृति सचान आदि फैकल्टी मौजूद रहीं।





















