होम राज्य उत्तर प्रदेश तम्बाकू का नशा विष बेल की मानिंद : डॉ. मंजुला

तम्बाकू का नशा विष बेल की मानिंद : डॉ. मंजुला

खास बातें
टीएमयू के फैकल्टी ऑफ एजुकेशन की ओर से वर्चुअली प्रोग्राम
प्रतिभागियों में छात्रा अनाम फातिमा ने मारी बाजी, अरीबा द्वितीय
प्रो. एमपी सिंह बोले, युवा पीढ़ी रहे नशे की आदत से दूर

एसोसिएट डीन डॉ. मंजुला जैन बतौर जज बोलीं, तम्बाकू के नशे की जड़ें आज सारे समाज पर विष बेल की भांति फैल चुकी हैं। समाज को इस बुराई से मुक्त करने के लिए कई उपाय एक साथ में अपनाए जाएं, तब ही इसकी जड़ें समाप्त होंगी। अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों से सिद्ध हो चुका है कि राजयोग के अभ्यास के जरिए शरीर में जो रासायनिक परिवर्तन होते हैं, उनसे स्वास्थ्य में सुधार आता है। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फैकल्टी ऑफ एजुकेशन में ऑनलाइन आयोजित विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर बोल रही थीं। बतौर निर्णायक मंडल सदस्य एवं छात्र-कल्याण निदेशक डॉ. एमपी सिंह बोले, यह बहुत ही दुर्भाग्य का विषय है कि भारत में नशे की गिरफ्त में अधिकतर युवा आबादी है। युवा देश का भविष्य है, यदि भविष्य ही खतरे में होगा तो देश कैसे सुरक्षित होगा। तम्बाकू खाने से फेफड़ों का कैंसर हो जाता है। हम पैसे रुपये देकर ऐसी भयानक बीमारियां खरीदते है। हमें अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए नशों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि नशे जहाँ हमारी शारीरिक हालत को खराब करते है वहीं यह हमारी मानसिक दशा को भी बिगाड़ते है। अनाम फातिमा-प्रथम, अरीबा रोज-द्वितीय, साक्षी स्वरुप ,बुतुल रिजबी और विभु सक्सेना तृतीय स्थान पर रहे।

फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन में ऑनलाइन तम्बाकू निषेध दिवस पर फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन के विभिन्न प्रोग्राम के विद्यार्थियों ने इसमें प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन की प्रिंसिपल डॉ. रश्मि मेहरोत्रा ने किया। सभी प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्यों में तम्बाकू से होने वाले अनेक रोगों और हानियों से भी परिचित कराया। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इससे मुक्त करवाना है, क्योंदकि तम्बाकू और धूम्रपान की लत ज्यािदातर नई पीढ़ी को प्रभावित कर रही है। तम्बाकू और धूम्रपान के सेवन से कई सारी परेशानियों को झेलना पड़ता है, जैसे – फेफड़े का कैंसर, मुंह का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, अल्सर, दमा, डिप्रेशन आदि भयंकर बीमारियां भी हो सकती हैं। इतना ही नहीं, महिलाओं में तम्बाकू का सेवन गर्भपात और होने वाले बच्चे में विकार उत्पन्न कर सकता है। विश्व स्वास्थ्या संगठन के मुताबिक निको‍टीन से हर साल 54 लाख मौतें होती हैं। अंत में निर्णायक मंडल के साथ-साथ सभी प्रतिभागियों का आदिनाथ कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन के प्रिंसिपल डॉ. रत्नेश जैन ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कोर्स प्रोग्राम के एचओडी डॉ. विनोद जैन, डॉ. अशोक लखेरा, डॉ. नम्रता जैन, एजुकेशन डिपार्टमेंट के एआर श्री दीपक मलिक के अलावा फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन के समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। संचालन डॉ. रश्मि मेहरोत्रा और डॉ. रत्नेश जैन ने किया। प्रोग्राम का सीधा प्रसारण यूट्यूब पर भी किया गया।

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