खास बातें
टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह बोले, ड्रग डिस्कवरी में सुपर कंप्यूटर वरदान
कम्प्यूटेशनल मेथड इन ड्रग डिस्कवरी को कोर्स में करें शामिल : रंगास्वामी
प्रो. द्विवेदी बोले, सिमुलेशन से मिलेगी फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री को नई दिशा
श्राडिंगर के वैज्ञानिक भट्ट ने सॉफ्टवेयर का दिया तकनीकी प्रशिक्षण
कौशिक कासोझाला ने समझाया मॉलिक्युलर डॉकिंग की प्रक्रिया
वैज्ञानिक नांदेकर ने बताए प्रोटीन सिलेक्शन के तरीके
श्राडिंगर के वाइस प्रेसिडेंट एवं जाने-माने वैज्ञानिक श्री रघु रंगास्वामी बोले, कम्प्यूटेशनल मेथड ड्रग डिस्कवरी में एक नई क्रांति है, नतीजतन न केवल खतरे कम हो गए है, बल्कि समय, धन और ऊर्जा की बचत भी होती है। उन्होंने सिमुलेशन और डाटा एनालिसिस को आज की जरुरत बताते हुए कम्प्यूटेशनल मेथड इन ड्रग डिस्कवरी को कोर्स में शामिल करने की पुरजोर वकालत की। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिसर्च एंड डवलपमेंट सेंटर-आरडीसी की ओर से कम्प्यूटेशनल मेथड इन ड्रग डिस्कवरी पर आयोजित वर्कशॉप में श्री रघु रंगास्वामी बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर बोल रहे थे। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने वर्कशॉप का श्रीगणेश किया। वर्कशॉप में श्राडिंगर के जाने-माने वैज्ञानिक श्री प्रितेश भट्ट, श्री कौशिक कासोझाला, श्री प्रज्ज्वल नांदेकर ने भी वर्चुअली प्रशिक्षण दिया। फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज – एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने वर्कशॉप को मील का पत्थर बताते हुए कहा, वर्कशॉप से स्टुडेंट्स, रिसर्चस और फैकल्टी तो लाभान्वित होंगे ही संग-संग फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री को भी नई दशा और दिशा मिलेगी। वर्कशॉप में केमिस्ट्री के विभागाध्यक्ष डॉ. वरुण सिंह, प्रो. केए गुप्ता, प्रो. असीम अहमद, डॉ. एमके चीनी, डॉ. गजेंद्र कुमार, डॉ. एडी त्रिपाठी, डॉ. नवनीत कुमार आदि फैकल्टी के संग-संग विज्ञान, फार्मेसी, मेडिकल और इंजीनियरिंग के करीब 60 स्टुडेंट्स ने भी प्रशिक्षण लिया। करीब छह घंटे की इस वर्कशॉप में टेक्निकल सवाल-जवाब का दौर भी चला।
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह बतौर मुख्य अतिथि ड्रग डिस्कवरी में सुपर कंप्यूटर को वरदान बताते हुए बोले, विभिन्न प्रकार के ड्रग्स के सिमुलेशन और डिज़ाइन को जल्दी से जल्दी तैयार किया जा सकता है। कोरोना वैक्सीन इसका एक जीता जागता उदाहरण है। श्राडिंगर के जाने-माने वैज्ञानिक श्री प्रितेश भट्ट ने सॉफ्टवेयर, उसके क्रियान्वयन, सिमुलेशन प्रक्रिया आदि को तकनीकी तौर पर गहनता से समझाया। श्राडिंगर के वैज्ञानिक श्री कौशिक कासोझाला ने केमिकल स्ट्रक्चर एडिटिंग, एनर्जी मिनिमाइज़िंग, मॉलिक्युलर डॉकिंग पर तकनीकी प्रशिक्षण दिया। वैज्ञानिक श्री प्रज्ज्वल नांदेकर ने प्रोटीन सिलेक्शन और लीड ऑप्टिमाइजेशन पर व्यापक प्रकाश डाला। रिसर्च एंड डवलपमेंट सेंटर-आरडीसी की फैकल्टी एवं वर्कशॉप के कोऑर्डिनेटर डॉ. सोविक सूर ने अपने स्वागत भाषण में कहा, यह कड़वा सच है, 90 प्रतिशत ड्रग क्लीनिकल ट्रायल और एफडीए अप्रूवल में फेल हो जाती हैं। नतीजन ड्रग निर्माण की लागत 75 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे में कम्प्यूटेशनल सिमुलेशन एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरा है और कम्प्यूटेशनल मेथड ने इंडस्ट्री और एकडेमिया को अपनी ओर आकर्षित किया है।


























